संभावित कारण
- प्रेगनेंसी में क्रोमोसोम की गड़बड़ी, जो उम्र के साथ बढ़ती है
- माता-पिता में से किसी एक में क्रोमोसोम का संतुलित बदलाव
- गर्भाशय की बनावट में फर्क, जैसे सेप्टम
- एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम, जिसमें खून के थक्के बनते हैं
- थायरॉइड और अनियंत्रित शुगर
लगभग आधे दंपतियों में कोई कारण नहीं मिलता, फिर भी अगली प्रेगनेंसी सफल होने की संभावना अच्छी रहती है।
ज़रूरी जाँचें
- गर्भाशय का अल्ट्रासाउंड, और ज़रूरत हो तो हिस्टेरोस्कोपी
- एंटीफॉस्फोलिपिड एंटीबॉडी टेस्ट
- थायरॉइड और शुगर की जाँच
- दोनों पार्टनर का कैरियोटाइप (क्रोमोसोम टेस्ट)
इलाज
- हिस्टेरोस्कोपी से सेप्टम, पॉलिप या फाइब्रॉइड हटाना
- एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम में प्रेगनेंसी के दौरान एस्पिरिन और हेपरिन
- थायरॉइड या शुगर का इलाज
- क्रोमोसोम बदलाव होने पर भ्रूण की जेनेटिक जाँच (PGT) के साथ आईवीएफ
- शुरुआती हफ़्तों में नियमित स्कैन और सहारा
सवाल-जवाब
गर्भपात के बाद जाँच कब करवानी चाहिए?
दो बार गर्भपात के बाद जाँच की सलाह दी जाती है। उम्र 35 से ज़्यादा हो तो एक बार के बाद भी सलाह ले सकते हैं।
क्या गर्भपात मेरी किसी गलती से हुआ?
लगभग कभी नहीं। ज़्यादातर गर्भपात प्रेगनेंसी में क्रोमोसोम की गड़बड़ी से होते हैं, जिन्हें रोका नहीं जा सकता था।
सभी रिपोर्ट नॉर्मल हों तो क्या करें?
यह आम है। फिर भी अगली प्रेगनेंसी सफल होने की संभावना अच्छी है, और शुरुआती स्कैन व नियमित देखभाल से मदद मिलती है।
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