भारत में क़ानून क्या कहता है
भारत में अंडा और शुक्राणु दान, Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 के अंतर्गत आता है। दानकर्ताओं की जाँच होती है, उनकी पहचान गोपनीय रहती है, और वे केवल पंजीकृत ART बैंक के माध्यम से आते हैं।
इसकी सलाह कब दी जाती है
दान किए गए अंडे:
- अंडों का बहुत कम होना या जल्दी मेनोपॉज़
- अंडों की गुणवत्ता के कारण बार-बार आईवीएफ असफल होना
- ऐसी जेनेटिक बीमारी जो महिला के अंडों से बच्चे में जा सकती हो
दान किए गए शुक्राणु:
- वीर्य में या सर्जरी से भी शुक्राणु न मिलना
- ऐसी जेनेटिक बीमारी जो पुरुष के शुक्राणु से बच्चे में जा सकती हो
प्रक्रिया कैसे होती है
- परामर्श और काउंसलिंग: डॉक्टर बताते हैं कि दान की सलाह क्यों दी जा रही है, इसमें क्या होता है और दूसरे विकल्प क्या हैं।
- दानकर्ता का चयन: पंजीकृत ART बैंक के माध्यम से, जाँच के बाद।
- इलाज: दान के अंडों को पति के शुक्राणु से आईवीएफ या आईसीएसआई द्वारा मिलाया जाता है। दान के शुक्राणु से आमतौर पर IUI या आईवीएफ किया जाता है।
- सहमति और रिकॉर्ड: क़ानून के अनुसार सभी की लिखित सहमति ली जाती है और रिकॉर्ड गोपनीय रहते हैं।
सवाल-जवाब
क्या भारत में अंडा दान क़ानूनी है?
हाँ। यह ART Act, 2021 के अंतर्गत नियंत्रित है। दानकर्ताओं को क़ानूनी शर्तें पूरी करनी होती हैं और वे पंजीकृत ART बैंक के माध्यम से आते हैं।
क्या बच्चा हमारा अपना होगा?
दान के अंडों से बच्चा आनुवंशिक रूप से पिता से जुड़ा होता है, और माँ ही उसे गर्भ में रखकर जन्म देती है। दान के शुक्राणु से बच्चा आनुवंशिक रूप से माँ से जुड़ा होता है।
क्या हम दानकर्ता के बारे में जान सकते हैं?
नहीं। भारतीय क़ानून के तहत दानकर्ता की पहचान गोपनीय रहती है।
क्या काउंसलिंग इसका हिस्सा है?
हाँ। फ़ैसला लेने से पहले हम दंपतियों को भावनात्मक और व्यावहारिक पहलुओं पर बात करने का समय देते हैं।
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