आईवीएफ फेल होने के आम कारण
- भ्रूण में क्रोमोसोम की गड़बड़ी: सबसे आम कारण, जो उम्र के साथ बढ़ता है
- गर्भाशय की समस्या: पॉलिप, फाइब्रॉइड, चिपकाव या पतली परत
- हाइड्रोसाल्पिंक्स: पानी से भरी बंद ट्यूब
- शुक्राणु की समस्या, जैसे DNA फ्रैगमेंटेशन
- प्रोटोकॉल या लैब से जुड़े कारण
हम क्या जाँचते हैं
- पिछली सभी साइकिल की रिपोर्ट: इंजेक्शन, अंडे, भ्रूण और ट्रांसफर की जानकारी
- हिस्टेरोस्कोपी से गर्भाशय की सीधी जाँच
- अल्ट्रासाउंड और ट्यूब की जाँच
- दोनों पार्टनर के लिए ज़रूरी ब्लड टेस्ट
अगली बार क्या बदला जा सकता है
- आपके अंडाशय के हिसाब से बदला हुआ प्रोटोकॉल
- पाँचवें दिन तक भ्रूण बढ़ाना, ताकि सबसे मज़बूत भ्रूण चुना जाए
- कुछ दंपतियों में भ्रूण की जेनेटिक जाँच (PGT-A)
- अगले ट्रांसफर से पहले गर्भाशय या ट्यूब की समस्या का इलाज
कुछ महँगे "ऐड-ऑन" इलाजों के पीछे वैज्ञानिक सबूत कमज़ोर हैं। हम साफ़ बताते हैं कि क्या साबित है और क्या नहीं।
सवाल-जवाब
कितनी बार आईवीएफ फेल होने पर दूसरी राय लेनी चाहिए?
एक बार भी बिना कारण फेल होने पर दूसरी राय लेना ठीक है। अपनी सभी पुरानी रिपोर्ट साथ लाएँ।
क्या अगली साइकिल तुरंत शुरू कर सकते हैं?
कई दंपति एक-दो पीरियड के बाद अगली साइकिल शुरू कर सकते हैं। अगर पहले कोई जाँच या सर्जरी ज़रूरी हो, तो डॉक्टर समय तय करते हैं।
क्या PGT-A से फायदा होगा?
कुछ दंपतियों को, खासकर ज़्यादा उम्र की महिलाओं को, इससे मदद मिल सकती है। यह सभी के लिए ज़रूरी नहीं है।
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