आईवीएफ की ज़रूरत कब होती है
- फैलोपियन ट्यूब बंद या खराब हों
- शुक्राणु बहुत कम हों या उनकी गतिशीलता कमज़ोर हो
- एंडोमेट्रियोसिस
- अंडों की संख्या कम हो (कम AMH)
- पीसीओएस, जब दवाओं और आईयूआई से सफलता न मिली हो
- बिना वजह का बांझपन, या कई बार आईयूआई असफल होना
आईवीएफ की प्रक्रिया, कदम दर कदम
- इंजेक्शन (8 से 12 दिन)
हार्मोन के इंजेक्शन से कई अंडे तैयार होते हैं। ज़्यादातर महिलाएँ ये घर पर लगाती हैं। - मॉनिटरिंग स्कैन
हर कुछ दिनों में अल्ट्रासाउंड से अंडों की बढ़त देखी जाती है। - अंडे निकालना
हल्की बेहोशी में 20 से 30 मिनट की प्रक्रिया। आप उसी दिन घर जाती हैं। - फर्टिलाइज़ेशन
लैब में आईवीएफ या ICSI से अंडे और शुक्राणु मिलाए जाते हैं। - भ्रूण ट्रांसफर
सबसे अच्छा भ्रूण, अक्सर पाँचवें दिन का ब्लास्टोसिस्ट, गर्भाशय में रखा जाता है। इसमें दर्द नहीं होता। - प्रेगनेंसी टेस्ट
ट्रांसफर के लगभग 11 दिन बाद ब्लड टेस्ट।
Ishwa IVF क्यों
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सवाल-जवाब
क्या आईवीएफ और टेस्ट ट्यूब बेबी एक ही हैं?
हाँ। टेस्ट ट्यूब बेबी आईवीएफ का आम नाम है। असल में भ्रूण टेस्ट ट्यूब में नहीं, लैब में एक खास डिश में बढ़ते हैं।
आईवीएफ की सफलता किन बातों पर निर्भर करती है?
सबसे बड़ा कारण महिला की उम्र और अंडों की संख्या है, फिर बांझपन की वजह और भ्रूण की गुणवत्ता। जाँच के बाद डॉक्टर आपकी अपनी संभावना के बारे में बताते हैं।
क्या आईवीएफ के दौरान आराम करना ज़रूरी है?
ज़्यादातर महिलाएँ अपना सामान्य काम जारी रख सकती हैं। अंडे निकालने वाले दिन आराम करें। भ्रूण ट्रांसफर के बाद लंबे समय तक बिस्तर पर रहने की ज़रूरत नहीं होती।
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