पीसीओएस क्या है
डॉक्टर आम तौर पर तब पीसीओएस मानते हैं जब इन तीन में से कम से कम दो बातें हों:
- अनियमित या रुके हुए पीरियड्स
- पुरुष हार्मोन ज़्यादा होने के संकेत, जैसे मुँहासे या चेहरे पर बाल
- अल्ट्रासाउंड में अंडाशय में कई छोटे फॉलिकल
पीसीओडी और पीसीओएस शब्द अक्सर एक ही स्थिति के लिए इस्तेमाल होते हैं।
पीसीओएस में प्रेगनेंसी के लिए इलाज
- वज़न और जीवनशैली
वज़न ज़्यादा हो तो सिर्फ़ 5 से 10 प्रतिशत वज़न कम करने से भी ओव्यूलेशन लौट सकता है। - ओव्यूलेशन की गोली
लेट्रोज़ोल आज पहली पसंद है, साथ में फॉलिकल स्कैन। - मेटफॉर्मिन
इंसुलिन रेज़िस्टेंस होने पर कुछ महिलाओं में। - इंजेक्शन और आईयूआई
गोली से सफलता न मिले तो। - आईवीएफ
जब बाकी इलाज असफल हों या दूसरे कारण भी हों। पीसीओएस में OHSS का खतरा ज़्यादा होता है, इसलिए हम सुरक्षित प्रोटोकॉल अपनाते हैं और अक्सर भ्रूण फ्रीज़ करके बाद में ट्रांसफर करते हैं।
सवाल-जवाब
क्या पीसीओएस में नेचुरल प्रेगनेंसी हो सकती है?
हाँ, कई महिलाओं को होती है, खासकर जब वज़न कम करने या इलाज से पीरियड्स नियमित हो जाएँ। 12 महीने कोशिश के बाद, या पीरियड्स बहुत अनियमित हों तो पहले ही, विशेषज्ञ से मिलें।
क्या पीसीओएस में हमेशा आईवीएफ करवाना पड़ता है?
नहीं। ज़्यादातर महिलाएँ ओव्यूलेशन की दवा, कभी-कभी आईयूआई के साथ, से ही गर्भधारण करती हैं।
क्या पीसीओएस में आईवीएफ ज़्यादा जोखिम भरा है?
पीसीओएस में OHSS का खतरा ज़्यादा होता है। हल्के प्रोटोकॉल, लगातार निगरानी और भ्रूण फ्रीज़ करके इस खतरे को कम किया जाता है।
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