पुरुष बांझपन के आम कारण
- शुक्राणुओं की कम संख्या, या वीर्य में शुक्राणु न होना (एज़ूस्पर्मिया)
- शुक्राणुओं की कमज़ोर गतिशीलता या असामान्य आकार
- वैरिकोसील: अंडकोष की नसों का फूलना
- हार्मोन की समस्या
- संक्रमण या सर्जरी के बाद रुकावट
- धूम्रपान, शराब, मोटापा और ज़्यादा गर्मी
जाँच कैसे होती है
- सीमेन एनालिसिस
सबसे ज़रूरी जाँच। सैंपल 2 से 7 दिन के परहेज़ के बाद दिया जाता है। रिपोर्ट असामान्य हो तो जाँच दोहराई जाती है। - हार्मोन ब्लड टेस्ट
FSH, LH, टेस्टोस्टेरोन और प्रोलैक्टिन। - अंडकोष का अल्ट्रासाउंड
वैरिकोसील या रुकावट देखने के लिए।
इलाज के विकल्प
- जीवनशैली में बदलाव और दवाएँ: शुक्राणु बनने में लगभग तीन महीने लगते हैं, इसलिए असर दिखने में समय लगता है
- आईयूआई: हल्की कमी होने पर
- आईसीएसआई: ज़्यादा कमी होने पर, हर अंडे में एक शुक्राणु
- सर्जरी से शुक्राणु निकालना (TESA या TESE): जब वीर्य में शुक्राणु न हों
सवाल-जवाब
क्या कम शुक्राणु होने पर भी पिता बनना संभव है?
ज़्यादातर मामलों में हाँ। हल्की कमी में दवा, जीवनशैली में बदलाव या आईयूआई मदद कर सकते हैं। बहुत कम शुक्राणु होने पर भी आईसीएसआई में हर अंडे के लिए सिर्फ़ एक स्वस्थ शुक्राणु चाहिए।
सीमेन एनालिसिस की तैयारी कैसे करें?
जाँच से पहले 2 से 7 दिन तक वीर्यपात न करें। हो सके तो सैंपल क्लिनिक में ही दें।
क्या पुरुष बांझपन की जाँच में दर्द होता है?
ज़्यादातर जाँचें सिर्फ़ सीमेन सैंपल और ब्लड टेस्ट हैं। ज़रूरत पड़ने पर शुक्राणु निकालने की सर्जरी बेहोशी में होती है।
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