यह कैसे होता है
- जाँच और योजना: पति-पत्नी दोनों की जाँच के बाद डॉक्टर इलाज की योजना बनाते हैं।
- इंजेक्शन: लगभग 10 से 12 दिन इंजेक्शन दिए जाते हैं, ताकि कई अंडे तैयार हों।
- अंडे निकालना: हल्की बेहोशी में अंडे निकाले जाते हैं।
- लैब का काम: अंडे और शुक्राणु मिलाए जाते हैं और एम्ब्रियो 3 से 5 दिन लैब में बढ़ते हैं।
- एम्ब्रियो ट्रांसफर: एक पतली नली से एम्ब्रियो बच्चेदानी में रखा जाता है। इसमें आमतौर पर बेहोशी की ज़रूरत नहीं होती।
- प्रेगनेंसी टेस्ट: लगभग दो हफ़्ते बाद ख़ून की जाँच होती है।
इसकी ज़रूरत कब पड़ती है
- नलियाँ बंद या ख़राब होना
- शुक्राणु बहुत कम या कमज़ोर होना
- उम्र बढ़ना या अंडों का कम होना (कम AMH)
- एंडोमेट्रियोसिस
- बार-बार IUI के बाद भी गर्भ न ठहरना
- बिना कारण का बांझपन, जब दूसरे इलाज से फ़ायदा न हुआ हो
हर दंपति को इसकी ज़रूरत नहीं होती। कई दंपतियों में दवा या IUI से भी गर्भ ठहर जाता है।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- "बच्चा टेस्ट ट्यूब में बड़ा होता है": नहीं। लैब में केवल शुरू के कुछ दिन होते हैं, फिर गर्भ सामान्य रूप से बच्चेदानी में बढ़ता है।
- "बच्चा पति-पत्नी का नहीं होता": अपने अंडे और शुक्राणु से बना बच्चा आनुवंशिक रूप से पति-पत्नी का ही होता है।
- "इससे लड़का या लड़की चुन सकते हैं": नहीं। भारत में लिंग चुनना क़ानूनन अपराध है और हम यह नहीं करते।
- "एक बार में पक्का हो जाता है": नहीं। कोई भी क्लिनिक गर्भ की गारंटी नहीं दे सकता।
सवाल-जवाब
क्या टेस्ट ट्यूब बेबी और आईवीएफ एक ही हैं?
हाँ। टेस्ट ट्यूब बेबी, आईवीएफ का ही आम बोलचाल का नाम है।
क्या टेस्ट ट्यूब बेबी सामान्य बच्चों जैसे होते हैं?
आईवीएफ से जन्मे ज़्यादातर बच्चे स्वस्थ होते हैं और सामान्य रूप से बड़े होते हैं। आपके डॉक्टर किसी भी ख़ास जोखिम के बारे में आपको बताएँगे।
इसमें कितना समय लगता है?
पहले इंजेक्शन से प्रेगनेंसी टेस्ट तक आमतौर पर चार से छह हफ़्ते लगते हैं।
क्या हमें अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा?
आमतौर पर नहीं। अंडे निकालने के दिन कुछ घंटे क्लिनिक में रुकना होता है।
इसका खर्च कितना है?
यह आपकी योजना पर निर्भर करता है। खर्च के पेज पर देखें कि इसमें क्या शामिल होता है, और अनुमान माँगें।
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